Wednesday, 17 October 2018

中国恐难在2017年前推行全国性碳交易计划

国旨在“2017年初”将40亿吨碳排放纳入全国性碳市场机制下,并建立全球规模最大的温室气体排放交易市场。中国打算自计划之初就将所有省份都纳入进来。

我们认为,中国国内立法进程和私营部门技术能力将限制这项宏伟的计划。

要保证全国性碳市场的正常运转,必须先解决一些主要的问题。

我们预计,中国的碳排放监管当局将无法实现原计划,一个覆盖全部省份的全国性碳交易市场在未来2年将无法建成。

此时此刻,我们有必要提出这样一个问题:中国碳交易计划的实施究竟有何重要意义?

首先,只有降低煤炭消费,中国的碳排放量才会降低,这已经成为老生常谈。同时,减少煤炭消费也与中国治理空气污染的努力有着密切的关联。

另外,在巴黎气候协议签署之后,全国性碳交易市场的推出也可以提升中国气候变化政策执行的透明度,在2018年全球各国“盘点”碳排放量之前,这一点无疑将受到国际社会的密切关注。

第三,如果我们观察中国过去三十年的经济发展历程,不难发现中国最富竞争力、发展最快的行业是那些主要由市场力量和竞争驱动的行业,而非国家管控的行业。

中国建立全国性碳交易市场的计划在巴黎联合国气候会谈期间得到了更加密切的关注,从中国代表团方面传出的最重要的消息就是中国主管气候变化事务的官员表示中国的全国性碳交易市场将于2017年初正式启动。

具体而言,这一市场将覆盖中国所有省份以及来自6个行业、15个子行业的近万家企业。

巴黎峰会期间,另外一位中国官员也表示,碳交易市场机制的设计必须‘严谨’,否则将无益于中国实现减排。

但我们要问,中国到2017年推出一个覆盖万家企业、设计严谨的碳交易市场的可能性有多大?

政策支持是否足够?

从全球范围来看,中国政府对碳交易市场的支持只有欧盟与之媲美。

中国首个碳交易市场试点项目于2013年6月在深圳启动,全国性碳交易市场的前景自此吸引了媒体关注。

若要在2017年初正式推出全国性碳交易计划,中国现在只有不到18个月的时间来准备市场所需的全部要件。

各有关监管机构都毫无疑问地支持全国碳交易项目的建设,尤其是国家主席习近平去年九月对此表示支持之后,各部门愈发全力支持。但要完成这项宏伟计划所必须具备的立法条件,还有大量的工作需要完成。

首先,中国任何新政策都需要相应的官方立法才能生效。早于2015年9月习近平主席访美,坊间已经传出立法草案的一些消息,但这些传闻太过抽象,缺乏关于碳市场的具体内容。

总体来说,碳交易立法流程甚至连一个初步的时间表都没有,对于局外人来说更是无法看透。

从理论上说,碳交易市场所采用法律的具体形式决定着其法律效力,并且无法保证碳交易最终立法与草案形式相同。

碳交易监管立法草案对于碳交易市场运作的方式及启动时间语焉不详。

不过,有两个确定的要点值得注意。

首先,碳交易相关立法估计会旷日持久,因为这一过程牵涉各类监管机构,可能由国家发展改革委员会( )牵头,从财政部到证监会的一众监管机构都会参与。

另外,相关政府机构中任何不确定性或者结构性的变化都可能拖延立法进程。

不过从乐观的角度估计,中国官方有可能快速完成立法,克服这个有可能阻碍2017年之前全国性碳市场落地的最大政治障碍。

尽管如此,立法绝非当局面临的唯一政治挑战。发改委负责气候变化事务的一位高级官员曾表示,全国碳交易计划的排放总量将比中国2020年和2030年总排放强度降低幅度更为严格。

这听起来很合理,并且与欧盟碳排放交易体系的做法相近——被后者纳入体系中的相关行业(发电、重工业)都面临着比碳市场之外的行业(例如交通和农业)更高的减排目标。但是为了落实这个体系,监管机构既要设定市场总体尺度,又要在市场涵盖的15个行业之间分配配额,同时完成这两项工作事实上十分复杂。

自从2014年以来,发改委已经要求10个行业的企业开始提交排放数据。但这一政策的实际执行情况以及向中央政府汇报的数据汇编都并不在公众监督之内。

欧盟碳排放交易体系等其他成熟碳市场的经验已经证明,没有充足的历史排放数据,市场容易发生配额过度的情况。总体来说,对于任何碳排放交易计划都至关重要的排放权分配过程变数很多。

因此,虽然高层的政治支持不会动摇,对于如何设计一个高水平的市场,仍然存在很多问题。

Monday, 1 October 2018

कौन हैं कर्ज़ लेकर नाइजीरिया भागने वाले गुजराती संदेसरा बंधु?

जो लोग चाय, जिलेटिन फ़ार्मा और कच्चे तेल का व्यापार करते हों और जिनकी आय करोड़ों में हो, वडोदरा में जिनका 60 हज़ार स्क्वॉयर फ़ीट का बंगला हो, जिसका इंटीरियर बॉलीवुड की सिलेब्रिटी इंटीरियर डिज़ाइनर सुजैन ख़ान और गौरी ख़ान ने तैयार किया हो, उनकी शान ओ शौक़त का अंदाज़ा लगाना ज़्यादा मुश्किल नहीं है.
लेकिन ऐसी राजसी ज़िंदगी जीने वाले संदेसरा बंधुओं के लिए फ़िलहाल अपने देश में चैन की सांस ले पाना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि सीबीआई और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) उनकी तलाश में है. फिलहाल ये दोनों भाई भारत से बाहर हैं.
59 साल के नितिन संदेसरा मूल रूप से वडोदरा के रहने वाले हैं लेकिन पले-बढ़े मुंबई में हैं.
नितिन चार्टड अकाउंटेड हैं. उनके भाई चेतन संदेसरा उनसे दो साल छोटे हैं.
ऊटी में टी-गार्डन ख़रीदकर स्टर्लिंग टी की शुरुआत करने वाले इन दोनों भाइयों ने उन व्यवसायों को चुना जिनका भविष्य उन्हें कामयाब नज़र आ रहा था और इसके ज़रिए उन्होंने अपने लिए सालाना कई करोड़ डॉलर की वार्षिक आय वाले व्यावसायिक समूहों की स्थापना की.
एक समय था जब औषधि और अन्य तरह के जिलेटिन से जुड़े उत्पाद के मामले में स्टर्लिन समूह का देश में 60 फ़ीसदी और दुनिया में 6 फ़ीसदी हिस्सा हुआ करता था.
किसी भी मशीन के हिस्से में हाथ से चलने वाले हत्थे (लेथ) की जगह जब सीएनसी मशीन का इस्तेमाल होने लगा तो इन भाइयों ने मशीन टूल के उत्पादन में हाथ आज़माया.
भारत में कच्चे तेल के उत्पादन और बिक्री के लिए दिग्गज सरकारी और निजी कंपनियां थी तब स्टर्लिंग ने नाइजीरिया में तेल के कुएं हासिल किए.
वहां उत्पादन शुरू करने वाली यह पहली कंपनी बनी जिसने वापस भारत को तेल बेचना शुरू किया.
ये तो कहानी थी संदेसरा समूह की सफलता की लेकिन फ़िलहाल इस परिवार को सरकारी जांच एजेंसियां खोज रही हैं.
ज़्ज़त और मुनाफ़ा
संदेसरा बंधुओं पर बैंकों का 5100 करोड़ रुपये का कर्ज़ न चुकाने का आरोप है. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी दोनों कंपनियों के नाम पर लिए गए लोन का इस्तेमाल दूसरी चीज़ों पर किया.
साल 1985 से 2017 के बीच जिस कंपनी ने सफल और बेदाग़ व्यापार किया हो, उसके प्रमोटर अचानक क्यों ग़ायब हैं. इतने लंबे अरसे में कमाई गई इज़्ज़त और मुनाफ़े का क्या हुआ और बैंकों से लिए गए बड़े कर्ज़ का क्या हुआ?
इन सवालों के जवाब जानने से पहले इन दोनों भाइयों और इनके परिवार के बारे में जान लेना ज़रूरी है.
नितिन सांडेसारे को व्यापार की अच्छी समझ है और उनकी शादी नहीं हुई है. कहा जाता है कि उन्होंने अपना पूरा समय व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए ही दिया है.
नितिन किसी भी नए क्षेत्र में निवेश करने से पहले उसकी अच्छी तरह परख कर लेते हैं ताकि स्टर्लिंग समूह को कोई नुक़सान ना हो.
बैंकों से लोन लेने के लिए प्रस्ताव बनाने में भी नितिन माहिर रहे हैं.
वडोदरा के कई लोगों का मानना है कि नितिन की सूझबूझ और इवेंट मैनेजमेंट के हुनर के कारण वडोदरा में आयोजित होने वाले नवरात्रि महोत्सव का डंका देश-विदेश में बजता है.

हर्षद मेहता कांड

नितिन संदेसरा और उनके समूह ने बड़े स्तर पर गरबा का आयोजन कर साबित किया कि नवरात्रि को एक बहुत बड़े मार्केटिंग इवेंट के तौर पर भी पेश किया जा सकता है.
हालांकि कुछ साल बाद स्टर्लिंग समूह इस आयोजन से अलग हो गया. जब हर्षद मेहता कांड सामने आया तब नितिन शेयर बाज़ार के बड़े खिलाड़ी हुआ करते थे.
हालांकि स्टॉक मार्केट में एशियाई बाज़ार में मौजूद ब्रोकर इस विषय पर कोई पुख़्ता जानकारी नहीं देते हैं.

नितिन के छोटे भाई की शोहरत उनकी पेज-थ्री पार्टियों की वजह से है. वो छोटी-छोटी वजहों से पार्टी देने और उनमें ख़ुद हाज़िर रहने के लिए जाने जाते हैं.
उनमें लोगों के साथ संबंध बनाने और भविष्य में इन संबंधों का इस्तेमाल कर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का हुनर है.
ऐसा कहा जाता है कि दूसरी कंपनियों के मुक़ाबले संदेसरा बंधुओं की कंपनी को नाइजीरिया में प्रवेश दिलाने और कच्चे तेल का उत्पादन करने के लिए सरकारी मंज़ूरी प्राप्त करने के पीछे चेतन का ही दिमाग था.
चेतन की पत्नी दीप्ति के संपर्क देश विदेश की मशहूर डिज़ाइनर, महंगे सामान बनाने वाले डीलर और बॉलीवुड सलेब्रिटीज़ के साथ बताए जाते हैं.
दीप्ति के सलेब्रिटी कनेक्शन, चेतन की लाइजनिंग और नितिन का दिमाग़ ही स्टर्लिंग कंपनी के मज़बूत स्तंभ माने जाते हैं.

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार संदेसरा समूह के वार्षिक बिक्री के आंकड़े उनकी कंपनी के हिसाब में दिखाई गई प्रॉपर्टी और व्यापार में विस्तार से मेल नहीं खाते. यह सबकुछ महज़ कागजों पर ही है.
जो प्लांट 45 करोड़ का खरीदा गया है वो 450 करोड़ का दिखाया गया है और इस दिखाई गई ऊंची क़ीमत पर लोन लिया गया है.
इसके अलावा बिक्री के आंकड़े भी झूठे हैं, झूठे बिल और हवाला के ज़रिए कंपनी की बिक्री ज़्यादा दिखाई गई है.
ऊंची ख़रीद और लगातार बिक्री दिखाकर कंपनी ने बैंकों से लोन लिया. लोन देने वाले बैंकों के अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप भी हैं.
बैंक लोन के पैसे को हवाला और शेल कंपनियों के ज़रिए विदेशों में भेजने का संदेसरा बंधुओं पर आरोप है.
सीबीआई का दावा है कि कंपनी के शेयर लिस्टेड थे. लेकिन पब्लिक के नाम पर दिखाए गए शेयर हक़ीकत में उन शेल कंपनियों (वो कंपनियां जो प्रायः क़ाग़ज़ पर ही चलती हैं) के पास थे जिनके मालिक कथित तौर पर उनके परिवारजन थे.
शुरुआती जांच के बाद सीबीआई ने आरोप लगाया था कि संदेसरा परिवार ने शेयर की क़ीमतों को कम और ज़्यादा कर करोड़ों रुपये कमाए.
अभी तक हुई जांच से वैसे तो बहुत अधिक बातें सामने नहीं आ पाई हैं क्योंकि मुख्य अभियुक्तों की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
लेकिन कहा जा रहा है कि नितिन और चेतन दोनों भाई नाइजीरिया में हैं.